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पर्यावरण से हम

विश्व पर्यावरण दिवस (World Environment Day) मत्सय पुराण मे कहा गया है- दशकूपसमा वापी दशवापीसमो ह्रदः । दशह्रदसमः पुत्रः दशपुत्रसमो द्रुमः ॥ अर्थात एक पेड़ दस पुत्र के समान है यह पर्यावरण संरक्षण के प्रति निष्ठा को व्यक्त करने के लिए काफ़ी है तात्कालिक वैश्विक चिन्ताओं एवं चिन्तन मे पर्यावरण संकट एवं उससे उत्पन्न समस्या ने पहली बार दुनिया का ध्यान 1972 में आकृष्ट किया जब संयुक्त राष्ट्र संघ की सामान्य सभा ने सर्वप्रथम स्टॉकहोम मे सम्मेलन करवाया ततपश्चात 5 जून 1974 को सर्वप्रथम पर्यावरण दिवस मनाने का सुझाव दिया । पहले पर्यावरण दिवस का थीम था       ' Only One Earth' अर्थात धरती एक है, जो पर्यावरण के प्रति दुनिया के चिन्ता को रेखांकित करने के लिए काफ़ी है ।  कॉरोना के इस प्राकृतिक आपदा के समय 2020 का यह दिवस जिसका थीम है 'Biodiversity — it’s time for nature'       पर्यावरण दिवस निम्न कारण से मनाया जाता है   1.पर्यावरण संरक्षण    2.पर्यावरण सुरक्षा    3.पर्यावरण प्रदूषण के कारण जानना    4.पर्यावरण सुधार      ...

विद्यालय और चेतना सत्र

विद्यालय और चेतना सत्र हम जानते हैं कि विद्यालय सामाजिक चेतना का केंद्र है। अगर परिभाषित किया जाय तो,- "विद्यालय वह औपचारिक स्थल है जहाँ बच्चों का शारीरिक, मानसिक,बौद्धिक,सामाजिक, व्यवहारिक गुणों का विकास होता है ।" प्रस्तुत आलेख में 'चेतना सत्र' मूल में है । आइये 'चेतना सत्र' की अवधारणा, उद्देश्य व उपयोगिता को समझते हैं । चेतना - शारीरिक और मानसिक रूप से जागृत होना या आसपास के वातावरण के तत्व का बोध होने या उन्हें समझने या उनकी बातों का मूल्यांकन करने का नाम चेतना है चेतना सत्र-- चेतना सत्र नैतिक मूल्यों और संस्कारों की संजीवनी है। बच्चों में सद्गुणों के विकास विद्यालय में प्रातः कालीन चेतना सत्र का मूल उद्देश्य है । इस सभा में समयबद्धता, सदव्यवहार, विचारों की अभिव्यक्ति एवं नेतृत्व क्षमता का व्यवहारिकण होता है।  चेतना सत्र का उद्देश्य ईश वंदना के द्वारा विद्यालय में शैक्षणिक वातावरण तैयार करना । जिस तरह हर नया काम प्रारंभ करने से पहले लगभग हम सभी मन ही मन उस कार्य की सिद्धि के लिए ईश्वर से प्रार्थना करते हैं। उसके बाद ही कार्य प्रारंभ करते हैं। कदाचित यह मनो...