पर्यावरण से हम
विश्व पर्यावरण दिवस
(World Environment Day)
मत्सय पुराण मे कहा गया है-
दशह्रदसमः पुत्रः दशपुत्रसमो द्रुमः ॥
अर्थात एक पेड़ दस पुत्र के समान है यह पर्यावरण संरक्षण के प्रति निष्ठा को व्यक्त करने के लिए काफ़ी है
तात्कालिक वैश्विक चिन्ताओं एवं चिन्तन मे पर्यावरण संकट एवं उससे उत्पन्न समस्या ने पहली बार दुनिया का ध्यान 1972 में आकृष्ट किया जब संयुक्त राष्ट्र संघ की सामान्य सभा ने सर्वप्रथम स्टॉकहोम मे सम्मेलन करवाया ततपश्चात 5 जून 1974 को सर्वप्रथम पर्यावरण दिवस मनाने का सुझाव दिया ।
पहले पर्यावरण दिवस का थीम था
'Only One Earth'
अर्थात धरती एक है, जो पर्यावरण के प्रति दुनिया के चिन्ता को रेखांकित करने के लिए काफ़ी है ।
कॉरोना के इस प्राकृतिक आपदा के समय 2020 का यह दिवस जिसका थीम है
पर्यावरण दिवस निम्न कारण से मनाया जाता है
1.पर्यावरण संरक्षण
2.पर्यावरण सुरक्षा
3.पर्यावरण प्रदूषण के कारण जानना
4.पर्यावरण सुधार
उपरोक्त वर्णित मामले के प्रति लोगों को जागरूक करना
पर्यावरण चेतना एवं पर्यावरण नैतिकता का विकास करना
भारतीय परम्परा एवं पर्यावरण
प्रश्न यह उठता है कि क्या यह मसला सिर्फ़ 1972 से है अथवा भारतीय समाज एवं संस्कृति इसके प्रति पहले से जागरूक रही है तो इसका सीधा जबाब है कि हाँ भारतीय समाज सदैव इसके प्रति प्राचीन काल से हीं जागरूक रही है और यह यहाँ की परंपरा और नैतिकता मे जड़ तक निवेशित है
जैव विविधता और भारतीय परिप्रेक्ष्य
जैव विविधता -इसका तात्पर्य धरातलीय, महासागरीय एवं अन्य जलीय पारिस्थितिकीय तंत्र मे उपस्थित अथवा उससे सम्बन्धित
तंत्र मे पाये जाने वाले जीवों के बीच विभिन्नता जैव विविधता है
धरती पर पाए जाने वाले लाखों प्रजाति के जीव, वनस्पति, कीड़ा, पतंग सभी का संतुलित रहना मनुष्य के लिए जरूरी है
भारतीय समाज शुरू से जैव विविधता मे विश्वास करता रहा है
नागपन्चमी के दिन सापों को दूध और लावा चढ़ाना, सावन मे इन्हें नही मारना, चींटियों को गुड खिलाना, वनस्पति जैसे तुलसी, पीपल की पूजा करना उन्हे नही काटने की परम्परा कही न कही पर्यावरण और जैव विविधता के प्रति संवेदनशीलता को प्रकट करता है,सिर्फ़ नही काटना ही नही इन्हे रोपना, तालाब खोदने को सबसे बड़ा पुण्य कार्य करना ।
नदियों की पूजा करने की परंपरा इसी चिन्तन की हिस्सा होगी की नदियों को प्रदूषित होने से बचाना है
*पर्यावरण में हमारी भूमिका*
वर्तमान की पर्यावरण बदलाव को देखते हुए हमें आवश्यकता है कि पर्यावरण को बचाने और जैव विविधता को बचाने मे अपनी भूमिका को सशक्त करें
1.अपने इर्द गिर्द के काम के लिए साईकिल का प्रयोग करें
2.मोटरवाहन का प्रयोग कम से कम करें
3.जहाँ तक सम्भव हो सार्वजनिक परिवहन का प्रयोग करें
4.कॉरोना काल मे बेशक बहुत जरूरी होने पर हीं घर से निकले
5.नदी, तालाब को गन्दा नही करें, गन्दा करने वालों को ऐसा करने से रोकें
6.हरे पेड़ पौधे नही काटे अधिक से अधिक पेड़ पौधे लगाये
7.बतौर शिक्षक हम बच्चों मे पर्यावरण संकट से समाज को बचाने और बच्चों मे पर्यावरण नैतिकता बढ़ाने के लिए उनके अन्दर अच्छी आदतें डालने के लिए काम कर सकते हैं
(अ) उन्हे अच्छा साहित्य पढ़ा सकते हैं
( ब) भाषण प्रतियोगिता का आयोजन कर सकते हैं
( स) पर्यावरण से सम्बन्धी महापुरुषों के बारे बतायें
(द) वाद विवाद का आयोजन
पोस्टर, क्विज, निबंध लेखन प्रतियोगिता, गायन, नाटक का मंचन करवा सकते हैं
केशव कुमार कश्यप
उ.म.वि. सरेंया टोला कमला मिश्र
प्रखण्ड-संग्रामपुर, पूर्वी चंपारण
बिहार
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें